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उपभोक्ता सहकारी संघ एक दॄष्टि में

उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकरी संघ लि० एक राज्य स्तरीय शीर्ष संस्था है जिसका गठन उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम १९९५ के अन्तर्गत हुआ था। वर्तमान में उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ लि० मल्टी स्टेट कोआपरेटिव एक्ट २००२ के अन्तर्गत निबन्धित है एवं इसकी निबन्धन संख्या एम एस सी/सी आर/८४५/२०१३ दिनांक ०३/०९/२०१३ है। इसका कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखण्ड है।

 

(1) उपभोक्ता संघ की स्थापना उत्तर प्रदेश में ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्र निवासियों को न्याय पंचायत स्तर पर कार्यरत प्रारम्भिक कॄषि ॠण सहकारी समितियों एवं नगरीय क्षेत्र में कार्यरत केन्द्रीय उपभोक्ता सहकारी भंडार एवं जिला सहकारी संघ व सहकारी क्रय-विक्रय समितियों (लीड समितियों) के माध्यम से, उनके दैनिक उपयोग की उपभोक्ता सामग्री उच्च गुणवत्तायुक्त एवं न्यूनतम मूल्य पर उपलब्ध करना है,जैसे साबुन, तेल, मंजन, नियंत्रित/अनियंत्रित वस्त्र, फुटविअर, टायर ट्यूब, खाद्यान्न, नमक, मसाले एवं अभ्यास पुस्तिका आदि की आपूर्ति सुनिश्चित कराने हेतु की गयी।

 

(2) उपभोक्ता संघ अपनी सदस्य सहकारी समितियों, थोक केन्द्रीय उपभोक्ता सहकारी भंडारों को उनके अनुरोध पर व्यवसायिक मार्गदर्शन एवं परामर्श देता है। इस हेतु निम्न कार्य भी सम्पादित किये जाते हैं:-

 

(i) राज्य के बाहर तथा अन्दर से उपभोक्ता वस्तुओं को क्रय करना।

 

(ii) सामग्री को गोदामों में रखना तथा एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने का प्रबन्ध करना।

 

(iii) सरकार, किसी जन-संस्था, निजी संस्था या सहकारी संस्था के अभिकर्ता के रूप में नियन्त्रित या अन्य उपभोक्ता वस्तुओं का वितरण करना, संग्रह करना तथा उसकी हैंडलिंग एवं परिवहन करना।

 

(iv) आवश्यक तथा लघु मात्रा में प्राप्त होने वाली उपभोक्ता सामग्रियों की पूर्ति एवं बढ़ते हुए दामों को नियन्त्रित करने में सहयोग देना।

 

(v) उपभोक्ता वस्तुओं के थोक व्यवसाय की एजेन्सी प्राप्त करना।

 

(vi) निबन्धक, सहकारी समितियाँ, उत्तर प्रदेश के अनुमोदन से ऐसे अनेक कार्यों को अपनाना और करना जो उद्देश्यों की पूर्ति में प्रासंगिक एवं व्यवहारिक हों और जिनसे सहकारी उपभोक्ता योजना कि वॄद्धि में सहायता प्राप्त हो।

 

(vii) ग्रामीण क्षेत्र में सांसद निधि, विधायक निधि तथा ग्राम्य विकास विभाग इत्यादि से प्राप्त धन से गाँव में सड़क, नाली, खडन्जा, हैन्डपम्प एवं अन्य विकास के कार्य कराना जैसा कि समय-समय पर स्थानीय प्रशासन/राज्य सरकार द्वारा निर्देशित हों।

 

(viii) गॄह निर्माण सामग्री आदि उपलब्ध कराने की व्यवस्था कराना एवं सदस्यों को आवश्कतानुसार निवास गॄह बनाना, या बनवाना और इस प्रयोजन के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराना तथा प्राविधिक सलाह देना व दिलाना।

 

(ix) किसानों/उपभोक्ताओं को यथा सम्भव एक ही केन्द्र से उपभोक्ता वस्तुओं के साथ-साथ उर्वरक, बीज, कॄषि यन्त्र, कीटनाशक दवायें, डीजल, मिट्टी का तेल, कुकिंग गैस (एल०पी०जी०/पैट्रोल पम्प) की एजेन्सी प्राप्त करना।

 

(x) जीवन रक्षक एवं अन्य औषधियों का व्यवसाय करना।

 

(xi) उर्वरक के ट्रांसपोर्टेशन का कार्य, रैक हैन्डलिंग का कार्य एवं हैन्डलिंग का कार्य करना।

 

(xii) मवेशियों के लिये पशु आहार, चारा, खली, बिनौले, भूसा आदि की व्यवस्था/व्यवसाय करना।

 
     
 
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